बच्चों में हाई आर्च (कैवस फुट): कारण, लक्षण और इलाज
फ्लैट फीट (सपाट पैर) के बारे में तो ज्यादातर माता-पिता ने सुना होता है, लेकिन इसके ठीक उलट एक स्थिति भी होती है — हाई आर्च, जिसे मेडिकल भाषा में "कैवस फुट" (Pes Cavus) कहा जाता है। जहां फ्लैट फीट ज्यादातर मामलों में एक सामान्य, हानिरहित विकास प्रक्रिया है, वहीं हाई आर्च को उतनी आसानी से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस लेख में जानेंगे कि हाई आर्च क्या है, यह क्यों होता है, और कब इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
हाई आर्च (कैवस फुट) क्या है?
हाई आर्च का मतलब है पैर के तलवे का मेहराब (आर्च) सामान्य से ज्यादा ऊंचा होना। इसे "क्लॉ फुट" या "हॉलो फुट" भी कहा जाता है। इसमें पैर का वजन ठीक से पूरे तलवे पर नहीं बंटता, बल्कि एड़ी और पंजे के अगले हिस्से पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे चलने के दौरान पैर की प्राकृतिक स्थिरता प्रभावित होती है।
फ्लैट फीट से यह कैसे अलग है?
यह समझना जरूरी है — फ्लैट फीट में ज्यादातर मामलों में कोई अंतर्निहित (underlying) बीमारी नहीं होती, और यह उम्र के साथ अपने आप ठीक हो जाता है। इसके विपरीत, हाई आर्च अक्सर किसी नर्व या मांसपेशी संबंधी (न्यूरोमस्कुलर) समस्या का संकेत हो सकता है। यही वजह है कि जब भी किसी बच्चे में हाई आर्च दिखे, तो सिर्फ पैर को न देखकर पूरे शरीर की, खासकर नर्वस सिस्टम की जांच करना जरूरी माना जाता है।
हाई आर्च के मुख्य कारण
हाई आर्च कई कारणों से हो सकता है:
न्यूरोमस्कुलर कारण (सबसे आम) — बच्चों में हाई आर्च का सबसे बड़ा कारण चार्कोट-मैरी-टूथ (CMT) बीमारी है, जो एक वंशानुगत नर्व संबंधी बीमारी है। इसमें पैर की कुछ मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं जबकि दूसरी मांसपेशियां उनकी भरपाई करने की कोशिश में ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, जिससे धीरे-धीरे आर्च ऊंचा होता जाता है। इसके अलावा स्पाइना बाइफिडा, सेरेब्रल पाल्सी, पोलियो, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, और रीढ़ या नर्व की चोट भी हाई आर्च का कारण बन सकते हैं।
इडियोपैथिक (अज्ञात कारण) — कुछ बच्चों में जांच के बावजूद कोई स्पष्ट न्यूरोलॉजिकल कारण नहीं मिलता; इसे इडियोपैथिक कैवस फुट कहा जाता है।
जन्मजात या चोट से जुड़ा — कुछ मामलों में यह जन्म से मौजूद होता है, या किसी चोट के बाद विकसित हो सकता है।
लक्षण क्या दिखते हैं?
हाई आर्च वाले बच्चों में अक्सर ये लक्षण देखे जाते हैं:
- पैर का मेहराब सामान्य से स्पष्ट रूप से ऊंचा दिखना
- उंगलियों का मुड़ा होना (क्लॉ टोज)
- तलवे के आगे या एड़ी वाले हिस्से में बार-बार कैलस/गोखरू बनना, क्योंकि वजन असमान रूप से पड़ता है
- टखने का बार-बार मुड़ना या मोच आना (ankle instability)
- चलने या दौड़ने के दौरान दर्द या असंतुलन महसूस होना
- कई बार पंजों के बल चलना (toe-walking)
- सही फिटिंग के जूते ढूंढने में दिक्कत
कब डॉक्टर को जरूर दिखाएं?
फ्लैट फीट के विपरीत, हाई आर्च को "बस इंतज़ार करें" कहकर टाला नहीं जाता। नीचे दिए गए संकेत मिलने पर बिना देर किए ऑर्थोपेडिक व न्यूरोलॉजिकल जांच करानी चाहिए:
- आर्च सिर्फ एक पैर में ऊंचा हो (असममित)
- पहले सामान्य दिख रहा पैर धीरे-धीरे बदल रहा हो (प्रोग्रेसिव डिफॉर्मिटी)
- पैर या टांग की मांसपेशियों में कमजोरी दिखे
- बार-बार टखना मुड़े या मोच आती रहे
- परिवार में किसी को नर्व या मांसपेशी संबंधी बीमारी (जैसे CMT) रही हो
- पीठ पर गड्ढा, बालों का गुच्छा या असामान्य निशान दिखे (यह रीढ़ की जन्मजात समस्या का संकेत हो सकता है)
जांच कैसे होती है?
डॉक्टर आमतौर पर इन चरणों में जांच करते हैं:
- फिजिकल जांच — पैर की बनावट, उंगलियों की स्थिति, कैलस, और यह देखना कि विकृति फ्लेक्सिबल है या रिजिड
- रीढ़ व नर्वस सिस्टम की जांच — चाल, रिफ्लेक्स, सेंसेशन और मांसपेशियों की ताकत की जांच
- वेट-बेयरिंग एक्स-रे — पैर की हड्डी की बनावट को विस्तार से देखने के लिए
- आगे की जांच, जरूरत पड़ने पर — रीढ़ की किसी छुपी समस्या को देखने के लिए MRI, नर्व की कार्यक्षमता जांचने के लिए EMG/नर्व कंडक्शन स्टडी, और CMT जैसी वंशानुगत बीमारियों के लिए जेनेटिक टेस्ट
इलाज के विकल्प
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि हाई आर्च कितना गंभीर है और क्या यह बढ़ रहा है:
हल्के, स्थिर मामलों में — सही सपोर्ट वाले जूते, कस्टम आर्च सपोर्ट/इनसोल, और फिजियोथेरेपी (स्ट्रेचिंग व मजबूती के व्यायाम) से काफी राहत मिल सकती है।
गंभीर या बढ़ते मामलों में — जब गैर-सर्जिकल इलाज पर्याप्त न हो, या विकृति लगातार बढ़ रही हो, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। यह सर्जरी थोड़ी जटिल हो सकती है और कई बार चरणों में की जाती है, ताकि पैर की बनावट और मांसपेशियों के संतुलन को ठीक किया जा सके।
अंतर्निहित बीमारी का इलाज — अगर हाई आर्च किसी नर्व संबंधी बीमारी जैसे CMT से जुड़ा है, तो उस बीमारी का कोई सीधा इलाज भले ही उपलब्ध न हो, लेकिन पैर की विकृति को मैनेज करना और आगे की जटिलताओं से बचाना संभव है।
माता-पिता के लिए सीधी सलाह
अगर आपके बच्चे के पैर का आर्च सामान्य से ऊंचा दिख रहा है, तो इसे हल्के में न लें — भले ही बच्चा फिलहाल सामान्य रूप से चल-दौड़ रहा हो। एक बार ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ को दिखाकर यह पुष्टि करा लेना बेहतर है कि कहीं इसके पीछे कोई नर्व या मांसपेशी संबंधी कारण तो नहीं। जल्दी पहचान और सही जांच से न सिर्फ पैर की समस्या, बल्कि किसी भी अंतर्निहित स्थिति को भी समय रहते पहचाना और मैनेज किया जा सकता है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है। अपने बच्चे के पैर की बनावट को लेकर किसी भी चिंता के लिए कृपया योग्य ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से संपर्क करें।
Dr. Gaurav Jain Associate Professor of Orthopaedics, LNCT Medical College & Sewakunj Hospital, Indore Director, GDP Care Pediatric Orthopaedics & Clubfoot Specialist (Ponseti Technique) drgauravjain.com | contact@drgauravjain.com
Dr. Gaurav Jain