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मिथक बनाम तथ्य: क्या बच्चों की हड्डी की समस्या में फिजियोथेरेपी सिर्फ सर्जरी के बाद ही ज़रूरी होती है?

13 September 2026 · Dr. Gaurav Jain, Pediatric Orthopedic Surgeon

मिथक बनाम तथ्य: क्या बच्चों की हड्डी की समस्या में फिजियोथेरेपी सिर्फ सर्जरी के बाद ही ज़रूरी होती है?

मिथक बनाम तथ्य: क्या बच्चों की हड्डी की समस्या में फिजियोथेरेपी सिर्फ सर्जरी के बाद ही ज़रूरी होती है?

जब भी "फिजियोथेरेपी" शब्द सुनते हैं, ज़्यादातर माता-पिता के मन में एक ही तस्वीर बनती है — सर्जरी के बाद की रिकवरी। इसी वजह से कई बार बच्चों की हड्डी या मूवमेंट से जुड़ी समस्याओं में फिजियोथेरेपी को शुरुआत में नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, यह सोचकर कि "अभी तो सर्जरी हुई ही नहीं, फिजियो की क्या ज़रूरत।" यह सोच न सिर्फ गलत है, बल्कि कई बार इससे इलाज में देरी भी हो जाती है।

❌ मिथक

बच्चों की हड्डी की समस्या में फिजियोथेरेपी सिर्फ सर्जरी के बाद ही ज़रूरी होती है:

यह धारणा फिजियोथेरेपी को सिर्फ "रिकवरी टूल" के तौर पर देखने से बनती है, जबकि असल में इसका दायरा कहीं बड़ा है।

✅ तथ्य

फिजियोथेरेपी रोकथाम, बिना सर्जरी इलाज, और सर्जरी के बाद रिकवरी — तीनों में बेहद कारगर है:

  • कई पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक स्थितियों में फिजियोथेरेपी शुरुआती इलाज का हिस्सा होती है, सर्जरी के बाद की बात तो बाद में आती है
  • सही समय पर शुरू की गई फिजियोथेरेपी कई मामलों में सर्जरी की ज़रूरत को पूरी तरह टाल भी सकती है
  • सर्जरी हो चुकी हो, तो भी फिजियोथेरेपी मूवमेंट, ताकत और फंक्शन वापस पाने में अहम भूमिका निभाती है
  • 💡सीधे शब्दों में: फिजियोथेरेपी का सही समय "सर्जरी के बाद" नहीं, बल्कि "जितनी जल्दी समस्या पता चले" होता है।

फिजियोथेरेपी बच्चों में कहां-कहां काम करती है

क्लबफुट

क्लबफुट के इलाज में Ponseti तकनीक (कास्टिंग के ज़रिए) मुख्य तरीका है, लेकिन इलाज यहीं खत्म नहीं होता। शोध में पाया गया कि Ponseti इलाज के बाद एक्सरसाइज़, मोबिलाइज़ेशन और किनेसियो टेपिंग वाला 3-फेज़ फिजियोथेरेपी प्रोग्राम बच्चों में ankle की मूवमेंट रेंज, फंक्शनल स्थिति और इलाज से संतुष्टि तीनों को बेहतर बनाता है।

फ्लैट फीट

ज़्यादातर बच्चों में पाए जाने वाले फ्लेक्सिबल फ्लैट फीट को औपचारिक इलाज की ज़रूरत ही नहीं होती — सही एक्सरसाइज़, संतुलित आहार और उचित जूते ही काफी होते हैं। हल्के दर्द वाले मामलों में भी सबसे पहले कंज़र्वेटिव इलाज ही सुझाया जाता है, जिसमें फुट ऑर्थोटिक्स, सही जूते और फिजियोथेरेपी के ज़रिए जॉइंट मोबिलाइज़ेशन व ankle फंक्शन ट्रेनिंग शामिल है।

स्कोलियोसिस

रीढ़ की हड्डी के टेढ़ेपन (स्कोलियोसिस) के इलाज में परंपरागत रूप से ब्रेसिंग को मुख्य तरीका माना जाता रहा है, लेकिन बढ़ते शोध बताते हैं कि फिजियोथेरेपी भी किशोर इडियोपैथिक स्कोलियोसिस के प्रभावी प्रबंधन में मदद कर सकती है। स्कोलियोसिस-स्पेसिफिक एक्सरसाइज़ तकनीकें तीन दिशाओं में सुधारात्मक एक्सरसाइज़, स्थिरता और संतुलन विकसित करने, सांस से जुड़ी एक्सरसाइज़ और पोश्चर की जागरूकता पर केंद्रित होती हैं।

टॉर्टिकॉलिस (गर्दन का जन्मजात टेढ़ापन)

यह शायद सबसे स्पष्ट उदाहरण है कि फिजियोथेरेपी सिर्फ सर्जरी के बाद की चीज़ नहीं है। कंजेनिटल मस्कुलर टॉर्टिकॉलिस (CMT) नवजात शिशुओं में होने वाली तीसरी सबसे आम मस्कुलोस्केलेटल समस्या है, जिसकी दर लगभग 0.3-3.9% पाई गई है। शोध साफ तौर पर बताते हैं कि जीवन के शुरुआती महीनों में शुरू की गई फिजियोथेरेपी (मुख्यतः स्ट्रेचिंग और मूवमेंट एक्सरसाइज़) से लक्षणों में तेज़ी से सुधार आता है, और शुरुआती पहचान व फिजियो से भविष्य में सर्जरी की ज़रूरत काफी हद तक कम हो जाती है। इसके उलट, अगर इलाज में देरी हो, तो सिर हिलाने में दिक्कत, चेहरे की बनावट में असमानता, और रीढ़ की हड्डी में मुआवज़ा देने वाला टेढ़ापन जैसी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

  • 💡यही वजह है कि टॉर्टिकॉलिस जैसी स्थितियों में डॉक्टर अक्सर तुरंत फिजियोथेरेपिस्ट के पास भेजने की सलाह देते हैं, भले ही उस वक्त सर्जरी का कोई सवाल ही न हो।

सर्जरी के बाद रिकवरी में भी ज़रूरी

यह ज़रूर सच है कि फिजियोथेरेपी सर्जरी के बाद भी उतनी ही ज़रूरी होती है। पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक रिकवरी में फिजियोथेरेपी बच्चों को उनकी मूवमेंट, ताकत और फंक्शन वापस पाने में मदद करती है, इसके लिए हर बच्चे की स्थिति के अनुसार एक्सरसाइज़, स्ट्रेचिंग, मैनुअल थेरेपी और मसाज तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यह सिर्फ फिजियोथेरेपी के इस्तेमाल का एक हिस्सा है, पूरी कहानी नहीं।

फिजियोथेरेपी के तीन मुख्य पहलू — एक नज़र में

  • रोकथाम — शुरुआती फिजियो कई विकृतियों को बढ़ने से रोक सकती है, खासकर नवजात शिशुओं की स्थितियों में
  • कंज़र्वेटिव मैनेजमेंट — फ्लैट फीट, माइल्ड स्कोलियोसिस जैसी स्थितियों में फिजियो अकेले ही मुख्य इलाज हो सकता है, सर्जरी टल सकती है
  • पोस्ट-सर्जिकल रिहैबिलिटेशन — सर्जरी के बाद मूवमेंट, ताकत और फंक्शन वापस पाने के लिए फिजियो ज़रूरी है

फिजियोथेरेपी को लेकर ध्यान रखने योग्य बातें

  • फिजियोथेरेपी कब शुरू करें, कितनी बार करें और कौन सी तकनीक सही है, यह बच्चे की उम्र और स्थिति पर निर्भर करता है
  • खुद से इंटरनेट पर देखकर एक्सरसाइज़ शुरू करने की बजाय पीडियाट्रिक फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सही गाइडेंस लें
  • घर पर एक्सरसाइज़ को सही तरीके से करना भी उतना ही ज़रूरी है जितना क्लिनिक में — इसलिए पेरेंट एजुकेशन फिजियो का अहम हिस्सा है
  • हर बच्चे की स्थिति अलग होती है, इसलिए थेरेपी का प्लान भी व्यक्तिगत रूप से तय किया जाना चाहिए

निष्कर्ष

फिजियोथेरेपी को सिर्फ "सर्जरी के बाद की चीज़" मानना बच्चों की कई हड्डी व मूवमेंट से जुड़ी समस्याओं में इलाज को देरी से शुरू करने का कारण बन सकता है। चाहे टॉर्टिकॉलिस हो, फ्लैट फीट हो, स्कोलियोसिस हो या क्लबफुट — फिजियोथेरेपी रोकथाम से लेकर बिना सर्जरी इलाज और सर्जरी के बाद रिकवरी तक, हर चरण में एक अहम भूमिका निभाती है। जितनी जल्दी सही सलाह ली जाए, नतीजे उतने ही बेहतर होते हैं।

अधिक जानकारी और व्यक्तिगत सलाह के लिए संपर्क करें: 370 Goyal Nagar Indore | 9111464959 | www.drgauravjain.com

संदर्भ

  • NCBI/PMC — Effect of Pediatric Physical Therapy Interventions on Congenital Muscular Torticollis: A Systematic Review, 2024 (https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC11486520/)
  • ScienceDirect — The effectiveness of three-phase physiotherapy program in children with clubfoot after Ponseti treatment (https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S1268773121000400)
  • NCBI/PMC — Physiotherapeutic Scoliosis-Specific Exercise Methodologies for Conservative Treatment of Adolescent Idiopathic Scoliosis (https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC9368145/)
  • NCBI/PMC — Pediatric Flatfeet: A Disease Entity That Demands Greater Attention and Treatment (https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC7026255/)
  • NCBI/PMC — Efficacy of Plantar Orthoses in Paediatric Flexible Flatfoot: A Five-Year Systematic Review (https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC9955448/)
  • Cleveland Clinic — Tackling Torticollis: Consider Early Referral to Physical Therapy (https://consultqd.clevelandclinic.org/tackling-torticollis-consider-early-referral-to-physical-therapy-for-managing-congenital-muscular-torticollis)

नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और यह किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने बच्चे की फिजियोथेरेपी से जुड़े फैसले हमेशा योग्य पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ या फिजियोथेरेपिस्ट से चर्चा करके ही लें।

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Dr. Gaurav Jain Associate Professor of Orthopaedics, LNCT Medical College & Sewakunj Hospital, Indore Director, GDP Care Pediatric Orthopaedics & Clubfoot Specialist (Ponseti Technique) drgauravjain.com | contact@drgauravjain.com