बच्चों की हड्डी की सर्जरी के बाद इम्प्लांट जिंदगी भर रहता है ???
मिथक बनाम तथ्य: क्या बच्चों की हड्डी की सर्जरी में इम्प्लांट हमेशा के लिए शरीर में रह जाता है?
जब किसी बच्चे की हड्डी टूटती है और डॉक्टर सर्जरी में प्लेट, स्क्रू या रॉड लगाने की बात करते हैं, तो ज़्यादातर माता-पिता के मन में सबसे पहला डर यही आता है — "क्या यह मेटल हमेशा के लिए मेरे बच्चे के शरीर में रह जाएगा?" यह डर स्वाभाविक है, लेकिन ज़्यादातर मामलों में यह धारणा सही नहीं है।
बच्चों की सर्जरी में मेटल इम्प्लांट हमेशा के लिए शरीर में रहता है:
यह सोच आमतौर पर वयस्कों में होने वाली कुछ स्थायी इम्प्लांट सर्जरी (जैसे जॉइंट रिप्लेसमेंट) को देखकर बनती है। लोग मान लेते हैं कि बच्चों में भी वैसा ही होता होगा।
ज़्यादातर बच्चों के इम्प्लांट हड्डी जुड़ने के बाद निकाले जा सकते हैं, और कुछ तो अपने आप घुल जाते हैं:
- ✅बच्चों की हड्डियां लगातार बढ़ती रहती हैं, इसलिए लंबे समय तक शरीर में रहने वाला मेटल इम्प्लांट ग्रोथ में रुकावट डाल सकता है
- ✅मज़बूत मेटल इम्प्लांट पर शरीर का भार जाने से हड्डी को खुद मज़बूत होने का मौका नहीं मिल पाता — इसलिए हड्डी जुड़ने के बाद इम्प्लांट निकालना फायदेमंद माना जाता है
- ✅रिसर्च के अनुसार बच्चों में होने वाले 60% से 90% तक इम्प्लांट रिमूवल पहले से प्लान की गई (इलेक्टिव) सर्जरी में किए जाते हैं, न कि किसी इमरजेंसी या जटिलता की वजह से
- ✅आजकल PLGA (Poly Lactic-co-Glycolic Acid) और मैग्नीशियम एलॉय जैसे बायोडिग्रेडेबल इम्प्लांट भी इस्तेमाल हो रहे हैं, जो समय के साथ शरीर में खुद घुल जाते हैं और इन्हें निकालने के लिए दूसरी सर्जरी की ज़रूरत ही नहीं पड़ती
- 💡सीधे शब्दों में: बच्चों में इस्तेमाल होने वाले ज़्यादातर इम्प्लांट अस्थायी सहारे के तौर पर काम करते हैं — हड्डी जुड़ने तक साथ देने के लिए, हमेशा के लिए शरीर में रहने के लिए नहीं।
बायोडिग्रेडेबल इम्प्लांट — भविष्य की दिशा
पिछले कुछ वर्षों में बायोडिग्रेडेबल इम्प्लांट को लेकर रिसर्च तेज़ी से आगे बढ़ी है। हाल की समीक्षाओं में पाया गया कि PLGA आधारित इम्प्लांट फ्रैक्चर हीलिंग, स्थिरता और जटिलताओं के मामले में पारंपरिक मेटल इम्प्लांट जितने ही असरदार हैं, और फोरआर्म, कलाई, टखने व कोहनी के फ्रैक्चर में इनका इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसी तरह मैग्नीशियम एलॉय इम्प्लांट के नतीजे टाइटेनियम इम्प्लांट के तुलनीय पाए गए हैं, और इनके लिए किसी अतिरिक्त सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती।
- बायोडिग्रेडेबल इम्प्लांट का सबसे बड़ा फायदा — बच्चे को दूसरी सर्जरी, दूसरी एनेस्थीसिया और उससे जुड़े जोखिमों से बचाया जा सकता है
- इमेजिंग (MRI/CT स्कैन) के दौरान भी ये मेटल इम्प्लांट की तुलना में कम रुकावट पैदा करते हैं
- हालांकि, हर तरह के फ्रैक्चर या हर उम्र के बच्चे के लिए बायोडिग्रेडेबल इम्प्लांट सही विकल्प नहीं होता — यह फैसला डॉक्टर ही ले सकते हैं
इम्प्लांट कब और क्यों निकाला जाता है
- जब हड्डी पूरी तरह जुड़ चुकी हो और इम्प्लांट की अब ज़रूरत न रहे
- जब बच्चे की ग्रोथ प्लेट के पास इम्प्लांट लगा हो और आगे बढ़त में रुकावट की आशंका हो
- जब इम्प्लांट से जलन, दर्द या इंफेक्शन जैसी समस्या हो
- जब वायर या पिन जैसे अस्थायी उपकरण इस्तेमाल हुए हों, जो शुरू से ही निकालने के लिए ही लगाए जाते हैं
- 💡ध्यान देने वाली बात: सिर्फ इसलिए कि इम्प्लांट निकल सकता है, इसका मतलब यह नहीं कि हर बच्चे के लिए रिमूवल सर्जरी ज़रूरी ही होगी। कई बार डॉक्टर मेटल इम्प्लांट को शरीर में ही छोड़ने की सलाह देते हैं, अगर इससे कोई परेशानी न हो।
क्यों ज़रूरी है सही जानकारी और डॉक्टर से सलाह
इम्प्लांट का प्रकार — मेटल हो या बायोडिग्रेडेबल — कई बातों पर निर्भर करता है: बच्चे की उम्र, हड्डी टूटने की जगह, फ्रैक्चर की गंभीरता और बच्चे की सामान्य सेहत। यह फैसला अकेले माता-पिता या इंटरनेट पर पढ़ी जानकारी से नहीं, बल्कि एक अनुभवी पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ की सलाह से ही लिया जाना चाहिए।
- सर्जरी से पहले डॉक्टर से पूछें कि किस तरह का इम्प्लांट इस्तेमाल होगा और क्यों
- पूछें कि क्या भविष्य में इसे निकालने की ज़रूरत पड़ेगी
- बायोडिग्रेडेबल विकल्प उपलब्ध है या नहीं, यह भी डॉक्टर से स्पष्ट रूप से जानें
- इम्प्लांट से जुड़े किसी भी लक्षण (दर्द, सूजन, जलन) को नज़रअंदाज़ न करें
निष्कर्ष
बच्चों की हड्डी टूटने पर सर्जरी की बात सुनकर घबराना स्वाभाविक है, लेकिन "मेटल हमेशा के लिए शरीर में रह जाएगा" वाला डर ज़्यादातर मामलों में निराधार है। आधुनिक पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स में इम्प्लांट को अक्सर एक अस्थायी सहारे के तौर पर डिज़ाइन किया जाता है — या तो इसे बाद में निकाला जाता है, या यह अपने आप शरीर में घुल जाता है। सही जानकारी और सही विशेषज्ञ की सलाह से यह फैसला आसान और भरोसेमंद बन जाता है।
अधिक जानकारी और व्यक्तिगत सलाह के लिए संपर्क करें: 370 Goyal Nagar Indore | 9111464959 | www.drgauravjain.com
संदर्भ
- NCBI/PMC — Biodegradable (PLGA) Implants in Pediatric Trauma: A Brief Review, 2024 (https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12840130/)
- PubMed — Resorbable implants in pediatric fracture treatment (https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31579775/)
- ScienceDirect — The potential for bioresorbable implants in paediatric fractures (https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S0020138302001377)
- NCBI/PMC — Application of biodegradable implants in pediatric orthopedics: shifting from absorbable polymers to biodegradable metals (https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC12008652/)
- NCBI/PMC — Indications for and Risks Associated With Implant Removal After Pediatric Trauma (https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC10566936/)
- ScienceDirect — Inpatient orthopaedic hardware removal in children: A cross-sectional study (https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S0976566217301546)
नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और यह किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने बच्चे के इलाज और इम्प्लांट के प्रकार से जुड़े फैसले हमेशा योग्य पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से चर्चा करके ही लें।
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Dr. Gaurav Jain Associate Professor of Orthopaedics, LNCT Medical College & Sewakunj Hospital, Indore Director, GDP Care Pediatric Orthopaedics & Clubfoot Specialist (Ponseti Technique) drgauravjain.com | contact@drgauravjain.com
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