बच्चों में फ्लैट फीट (सपाट पैर): क्या सर्जरी वाकई जरूरी होती है?
# बच्चों में फ्लैट फीट (सपाट पैर): क्या सर्जरी वाकई जरूरी होती है?
बच्चे की एड़ी उठाकर जब आप उसका पैर देखते हैं और अंदर की तरफ कोई आर्च (मेहराब) नज़र नहीं आता, तो ज्यादातर माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया होती है — "क्या इसे ऑपरेशन की जरूरत पड़ेगी?" यह एक बहुत आम सवाल है, और अच्छी खबर यह है कि ज्यादातर मामलों में जवाब है — नहीं।
इस लेख में हम समझेंगे कि फ्लैट फीट असल में क्या है, यह कब सामान्य है, कब चिंता की बात है, और सर्जरी की जरूरत आखिर कब और किन बच्चों में पड़ती है।
## फ्लैट फीट क्या होता है?
फ्लैट फीट (Pes Planus) एक ऐसी स्थिति है जिसमें पैर के तलवे का आर्च सामान्य से कम ऊंचा होता है, जिससे पूरा तलवा ज़मीन के लगभग बराबर संपर्क में रहता है। यह दुनियाभर में बच्चों में सबसे आम मस्कुलोस्केलेटल (हड्डी-मांसपेशी संबंधी) समस्याओं में से एक है, और अनुमानित रूप से करीब 20% बच्चों में किसी न किसी उम्र में यह देखा जाता है।
फ्लैट फीट मुख्यतः दो तरह का होता है
**फ्लेक्सिबल (लचीला) फ्लैट फीट** — इसमें बच्चा जब पैर ज़मीन पर नहीं रखता (non-weight-bearing) तो आर्च दिखाई देता है, लेकिन खड़े होने पर पैर सपाट हो जाता है। यह दर्द रहित होता है और ज्यादातर मामलों में सामान्य विकास का हिस्सा है।
**रिजिड (कड़ा) फ्लैट फीट** — इसमें आर्च किसी भी स्थिति में नज़र नहीं आता, पैर अकड़ा हुआ महसूस होता है, और यह अक्सर किसी अंतर्निहित (underlying) हड्डी या तंत्रिका संबंधी कारण से जुड़ा होता है। इस तरह के मामलों में डॉक्टरी जांच जरूरी होती है।
## क्या फ्लैट फीट सामान्य है?
छोटे बच्चों के पैरों में आर्च जन्म से नहीं होता — यह उम्र के साथ धीरे-धीरे विकसित होता है। ज्यादातर बच्चों में 3 से 6 साल की उम्र के बीच आर्च अपने आप बनना शुरू होता है, और कुछ बच्चों में इसमें 8-10 साल तक का समय भी लग सकता है। इसलिए छोटी उम्र में फ्लैट फीट दिखना घबराने की बात नहीं है — यह सामान्य विकास प्रक्रिया का हिस्सा है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स (AAOS) के अनुसार, दर्द रहित, लचीले फ्लैट फीट में किसी इलाज से पैर की बनावट में कोई साफ फर्क आने का ठोस प्रमाण नहीं मिलता — इसलिए ज्यादातर मामलों में सिर्फ निगरानी (observation) ही सबसे बेहतर तरीका माना जाता है।
## कब सतर्क रहें — किन लक्षणों पर ध्यान दें
फ्लैट फीट को लेकर डॉक्टर से सलाह लेना तब जरूरी हो जाता है जब बच्चे में निम्न में से कोई लक्षण दिखे
- पैर या टखने में दर्द, खासकर चलने या दौड़ने के बाद
- पैर का अकड़ा हुआ महसूस होना (आर्च किसी भी स्थिति में न दिखना)
- टखने की गति (ankle movement) का सीमित हो जाना
- चलने के तरीके (गेट) में बदलाव
- सामान्य गतिविधि के बाद असामान्य रूप से जल्दी थक जाना
- सिर्फ एक पैर में फ्लैट फीट होना (असममित/asymmetric)
अगर ऊपर के लक्षण नहीं हैं और बच्चा सामान्य रूप से दौड़-भाग कर पा रहा है, तो चिंता की जरूरत नहीं।
## बिना सर्जरी के इलाज के विकल्प
ज्यादातर फ्लेक्सिबल फ्लैट फीट के मामलों में इलाज की जरूरत ही नहीं पड़ती। जहां जरूरत महसूस हो, वहां ये तरीके अपनाए जाते हैं
**सही जूते** — आगे से थोड़े खुले, मजबूत तलवे और अच्छी एड़ी व आर्च सपोर्ट वाले लेस-अप जूते ज्यादातर बच्चों के लिए काफी होते हैं।
**आर्च सपोर्ट / इनसोल** — ध्यान रहे कि इनसोल या ऑर्थोटिक्स पैर के आर्च को "बना" नहीं सकते, यह एक आम गलतफहमी है। लेकिन दर्द या असुविधा होने पर ये आराम जरूर दे सकते हैं। शोध बताते हैं कि साधारण, मुलायम कुशन वाले इनसोल भी महंगे कस्टम ऑर्थोटिक्स जितना ही असरदार होते हैं, और सख्त आर्च सपोर्ट कई बार दर्द बढ़ा भी सकते हैं — इसलिए इन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही चुनें।
**फिजियोथेरेपी और स्ट्रेचिंग** — एड़ी के टेंडन (Achilles tendon) को लचीला बनाए रखने वाले व्यायाम, खासकर जिन बच्चों में हल्की जकड़न हो, फायदेमंद होते हैं।
**नंगे पैर सुरक्षित सतह पर चलना** — घर के अंदर सुरक्षित फर्श पर नंगे पैर चलने-खेलने देने से पैर की मांसपेशियां मजबूत होने में मदद मिलती है।
## सर्जरी कब और किन मामलों में जरूरी होती है?
यहां मुख्य बात समझने वाली है — **सर्जरी की जरूरत बहुत ही कम बच्चों में पड़ती है।** यह सिर्फ तब पर विचार में लाई जाती है जब
1. बच्चे को लगातार दर्द रहता हो, जिससे उसकी रोज़मर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हों
2. फ्लैट फीट रिजिड (कड़ा) हो या समय के साथ बिगड़ता जा रहा हो
3. कम से कम 6 महीने तक सही तरीके से चला गैर-सर्जिकल इलाज — सही जूते, कस्टम इनसोल, फिजियोथेरेपी — के बावजूद कोई सुधार न हो
4. बच्चे के पैर की हड्डियों का विकास काफी हद तक हो चुका हो — आमतौर पर यह उम्र 8-10 साल के बाद, और अक्सर किशोरावस्था (टीनएज) में देखा जाता है, जब दर्द बना रहता हो
दूसरे शब्दों में कहें तो — सर्जरी आखिरी विकल्प है, पहला नहीं। ज्यादातर आर्थोपेडिक विशेषज्ञ पहले महीनों तक कंज़र्वेटिव (गैर-सर्जिकल) इलाज को पूरी तरह आज़माने की सलाह देते हैं, और सर्जरी का सुझाव तभी देते हैं जब यह इलाज असफल हो और बच्चे को स्पष्ट तकलीफ हो।
## माता-पिता के लिए सीधी सलाह
अगर आपका बच्चा 6 साल से छोटा है और उसे कोई दर्द या चलने में दिक्कत नहीं है, तो फ्लैट फीट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं — बस नियमित बाल रोग विशेषज्ञ या ऑर्थोपेडिक जांच के दौरान इस पर नज़र रखें। अगर बच्चा 6 साल से बड़ा है, या दर्द, अकड़न, थकान या चाल में बदलाव जैसे लक्षण दिखें, तो एक बार ऑर्थोपेडिक डॉक्टर को जरूर दिखाएं — ज्यादातर मामलों में सही जूते और थोड़े व्यायाम से ही समस्या संभल जाती है।
**संक्षेप में:** सर्जरी बहुत ही कम, गंभीर और दर्द वाले उन मामलों में जरूरी होती है जो गैर-सर्जिकल इलाज से ठीक नहीं होते — और यह आमतौर पर 10 साल से बड़े बच्चों में देखा जाता है।
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*यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है। अपने बच्चे के पैरों को लेकर किसी भी चिंता के लिए कृपया योग्य ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से संपर्क करें।*
**डॉ गौरव जैन**
📞 9111464959 | 🌐 www.drgauravjain.com
Dr. Gaurav Jain